90 वर्षीय अपंग कछुए को पहियों से लैस किया गया

90 वर्षीय अपंग कछुए को पहियों से लैस किया गया
एक 90 वर्षीय मादा कछुआ प्रकृति की क्रूरता का शिकार हो गयी थी, उसका नाम श्रीमती टी था।अपने अंडों को सेने की प्रक्रिया(हेचिंग) के दौरान जब वह सुप्तावस्था में थी,तभी उस पर चूहों ने हमला कर दिया था।उस बेचारी के अगले पैरों को चूहों ने कुतर कर उसे अपंग बनाकर मरने के लिये छोड़ दिया था। श्रीमती टी के मालिक बहुत ही संवेदनशील इंसान थे,उन्हें उसको इस हालत में देखना कतई गवारा नहीं था ।पहले उन्होंने मोची से समपर्क साधकर उससे कृत्रिम पैर लगवाने का विचार बनाया।जिसमें उसे आपरेशन कर टांकों दवारा पैर जोड़ा जाना था,परंतु इस प्रक्रिया में उसके जीवित रह पाने की सम्भावनायें कम थीं।उसके मालिक जूड राइडर ने यह विचार त्याग कर उसके शरीर के अगले हिस्से में एक जोड़ी पहियों को रेजिन दवारा जोड़ दिया।अब वह इन पहियों की मदद से अपने पिछले पैरों दवारा पहले की तुलना में अधिक तेजी से चल लेती है।हालांकि ऐसा पहली बार नहीं किया गया है, इसके पहले मार्च 2014 में एक 23 वर्षीय कछुआ, जिसका नाम सैप्टिमस था, उसे मॉडल विमान के पहिये लगाये गये थे।उसके भी पैरों को चूहों ने कुतर दिया था।एक बार फिर से श्रीमती टी नामक 90 वर्षीय मादा कछुआ, जब वह अपने मालिक के बगीचे में सुप्तावस्था में थी तभी चूहों ने उसके पैरों को कुतर कर उसे अपंग कर दिया था, उसे एक जोड़ी पैर लगाकर चलने फिरने लायक बना दिया गया है। द टेलीग्राफ और बीबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक पेम्ब्रोक, वेस्ट वेल्स निवासी ओवेर ज्यूड राइडर जो श्रीमती टी के मालिक हैं उनके पुत्र डेल सिनक्लेयर-जोन्स  जो पेशे से एक इंजीनियर हैं उन्होंने माडल विमान के एक जोड़ी पहियों को रेजिन/गलू से उसके कवच को जोड़ दिया है।अब यह पालतू सरीसृप प्राणी पहले से बेहतर तरीके से इधर उधर चल फिर सकता है, तथा प्रकृति के नजारों का दीदार करने में सक्षम है।
प्रस्तुति-राजेश कुमार
एक 90 वर्षीय मादा कछुआ प्रकृति की क्रूरता का शिकार हो गयी थी, उसका नाम श्रीमती टी था।अपने अंडों को सेने की प्रक्रिया(हेचिंग) के दौरान जब वह सुप्तावस्था में थी,तभी उस पर चूहों ने हमला कर दिया था।उस बेचारी के अगले पैरों को चूहों ने कुतर कर उसे अपंग बनाकर मरने के लिये छोड़ दिया था। श्रीमती टी के मालिक बहुत ही संवेदनशील इंसान थे,उन्हें उसको इस हालत में देखना कतई गवारा नहीं था ।पहले उन्होंने मोची से समपर्क साधकर उससे कृत्रिम पैर लगवाने का विचार बनाया।जिसमें उसे आपरेशन कर टांकों दवारा पैर जोड़ा जाना था,परंतु इस प्रक्रिया में उसके जीवित रह पाने की सम्भावनायें कम थीं।उसके मालिक जूड राइडर ने यह विचार त्याग कर उसके शरीर के अगले हिस्से में एक जोड़ी पहियों को रेजिन दवारा जोड़ दिया।अब वह इन पहियों की मदद से अपने पिछले पैरों दवारा पहले की तुलना में अधिक तेजी से चल लेती है।हालांकि ऐसा पहली बार नहीं किया गया है, इसके पहले मार्च 2014 में एक 23 वर्षीय कछुआ, जिसका नाम सैप्टिमस था, उसे मॉडल विमान के पहिये लगाये गये थे।उसके भी पैरों को चूहों ने कुतर दिया था।एक बार फिर से श्रीमती टी नामक 90 वर्षीय मादा कछुआ, जब वह अपने मालिक के बगीचे में सुप्तावस्था में थी तभी चूहों ने उसके पैरों को कुतर कर उसे अपंग कर दिया था, उसे एक जोड़ी पैर लगाकर चलने फिरने लायक बना दिया गया है। द टेलीग्राफ और बीबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक पेम्ब्रोक, वेस्ट वेल्स निवासी ओवेर ज्यूड राइडर जो श्रीमती टी के मालिक हैं उनके पुत्र डेल सिनक्लेयर-जोन्स  जो पेशे से एक इंजीनियर हैं उन्होंने माडल विमान के एक जोड़ी पहियों को रेजिन/गलू से उसके कवच को जोड़ दिया है।अब यह पालतू सरीसृप प्राणी पहले से बेहतर तरीके से इधर उधर चल फिर सकता है, तथा प्रकृति के नजारों का दीदार करने में सक्षम है।



प्रस्तुति-राजेश कुमार

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