प्रश्नोत्तर- एक कविता


प्रश्नोत्तर- एक कविता
हर इक प्रश्न रखे है उत्तर पर ये कुछ प्रश्न निरुत्तर हैं।
सुतायें पूछें जुल्म सहें कबतक मुक्ति कितनी दूर है।
पितृ सम्पत्ति से कब देगा भैया अरु हक अपना मैं पाऊँगी।
कब दहेज मुक्त शादी द्विवसनों में पीहर से पीघर जाऊँगी।
रचनाकार- राजेश कुमार, कानपुर

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