कविता- एक कविता


कविता  
कविता शब्दों की सुमनहार दिल के आर पार हो जाये।
कुंठित दूषित दुखित दिलों को भी ये हरषित कर जाये।
कविता में संगीत पिरो कर वाणी का तूणीर बनायें।
शरसंधान करे सुर लहरी रोम रोम बिंध कर रह जाये।

रचनाकार- राजेश कुमार,  कानपुर

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