संदेश

उमंग-एक कविता

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उमंग-एक कविता लहरें उठें उमंग की प्रियतम आवन का संदेशा जब आये। हूक उठे दिल धक-धक करे पुलकित जियरा मेरा घबराये। प्रियतम संग मिलन करूँ मैं कैसे नयना अँसुआ बरसाये। हाल जिया सखियाँ सब जानें मुखड़ा चुगली कर बतलाये। रचनाकार- राजेश कुमार ,  कानपुर

आज्ञाकारी पति

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आज्ञाकारी पति

विदेशी उपहार

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विदेशी उपहार

नर-मादा की पहचान

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नर-मादा की पहचान

गिरगिट के रंग-एक कविता

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गिरगिट के रंग-एक कविता

एक बहाना

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एक बहाना

ई-मेल गलत पते पर

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ई-मेल गलत पते पर